अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। ये प्रतिबंध रूस की यूक्रेन युद्ध में वित्तीय मदद करने वाली कंपनियों को निशाना बनाते हैं। इस फैसले के बाद भारत की कई बड़ी कंपनियां, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत सरकारी तेल कंपनियां शामिल हैं, रूस से तेल की खरीद में सतर्क हो गई हैं और कदम पीछे खींच रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापारिक सुरक्षा को लेकर कंपनियों में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस बीच भारत सरकार ने कहा है कि भारत के ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता और पेट्रोलियम सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। हालांकि, भारत की कंपनियों का रुख रूस से तेल आयात में अचानक बदलाव को लेकर अस्थिर प्रतीत हो रहा है। इसके अलावा, अमेरिका के प्रतिबंधों की छाया में कंपनियां अपने व्यापारिक फैसलों में अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार का अंतरराष्ट्रीय वित्तीय या कानूनी संकट न झेलना पड़े। इस कदम का असर वैश्विक तेल बाजार और भारत में ईंधन आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में रूस से तेल की खरीद और रणनीति पर नई चर्चाएं और नीति निर्धारण हो सकते हैं।
Published: October 24, 2025
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Source: Meta News Channel
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