कमीशन मांगने के आरोपों में घिरे तीन विधायकों का विधायक निधि (एमएलए फंड) रोक दिया गया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा की सदाचार समिति अब पूरे प्रकरण की जांच करेगी। आरोप है कि संबंधित विधायकों ने विकास कार्यों की स्वीकृति और भुगतान के बदले कमीशन की मांग की थी। शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिक पड़ताल की गई, जिसके आधार पर यह सख्त कदम उठाया गया।
इस मामले में कांग्रेस और भाजपा, दोनों दलों ने अपने-अपने विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। दोनों ही पार्टियों ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के आरोपों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। सदाचार समिति शिकायतकर्ताओं, संबंधित अधिकारियों और विधायकों के बयान दर्ज कर तथ्यों की पड़ताल करेगी, ताकि निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक फंड रोके जाने का फैसला एक कड़ा संदेश देता है और इससे पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, विपक्ष ने इसे नैतिकता से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सभी की नजरें सदाचार समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
Published: December 15, 2025
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Source: Meta News Channel
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