जोधपुर-जयसलमेर हाईवे पर हुई स्लीपर बस आग के बाद परिवहन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी है। जांच में खुलासा हुआ कि हादसे की शिकार बस को जोधपुर के एक कारखाने में मॉडिफाई किया गया था। बस की बॉडी में कई खामियां थीं, जिससे इमरजेंसी निकास के रास्ते संकरी हो गए थे और सुरक्षा मानक पूरे नहीं हुए थे। इसके बावजूद चित्तौड़गढ़ के परिवहन अधिकारियों ने बस की बॉडी को अप्रूव कर रजिस्ट्रेशन कर दिया। इस पर कार्रवाई करते हुए डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया गया। विभाग की टीम ने जोधपुर स्थित उस कारखाने में दबिश देकर 66 बस चेसिस और बॉडी जब्त की और कारखाना संचालक को निर्देश दिए कि आगे किसी भी बस बॉडी और चेसिस में बदलाव न किया जाए। मामले की जांच में यह भी पता चला कि निजी कारखानों में बस बॉडी बनवाने का मुख्य कारण लागत कम करना है, जिससे अक्सर सुरक्षा मानक अनदेखे रह जाते हैं। परिवहन विभाग ने जैसलमेर हादसे के बाद अभियान चलाया है और जयपुर सहित कई जिलों में स्लीपर बसों की जांच कर नियम विरुद्ध संचालन रोकने का कदम उठाया है।
Published: October 17, 2025
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Source: Meta News Channel
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