जयपुर राजस्थान में सियासी और विधायी हलकों में हलचल मच गई है। राज्यपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल के दौरान पारित किए
गए कुल 9 विधेयकों को सरकार को वापस लौटा दिया है। इनमें ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लाए गए विधेयक भी शामिल हैं। राज्यपाल की ओर से इन बिलों पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताई गई है और कुछ कानूनी व संवैधानिक बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इससे एक बार फिर राज्य सरकार और राजभवन के बीच विधायी प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
लौटाए गए विधेयकों में दो प्राइवेट यूनिवर्सिटी से जुड़े बिल भी शामिल हैं, जिनमें नियमों, प्रशासनिक ढांचे और मानकों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। राज्यपाल का कहना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े इन विधेयकों में कुछ प्रावधानों पर और स्पष्टता जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी जटिलता उत्पन्न न हो। वहीं, ऑनर किलिंग और मॉब लिंचिंग जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनाए गए कानूनों को लौटाए जाने से विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं और इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, लौटाए गए सभी 9 विधेयकों पर अब दोबारा समीक्षा की जाएगी और आवश्यक संशोधन के बाद इन्हें फिर से राज्यपाल के पास भेजा जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम को आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति और विधायी एजेंडे के लिए अहम माना जा रहा है।
Published: January 29, 2026
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Source: Meta News Channel
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