बारां जिले में रामसेतु परियोजना के तहत कूल नदी पर रामगढ़ बैराज का निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यह वही नदी है जो 1972 में डाकुओं द्वारा किए गए अपहरण के मामलों के कारण चर्चाओं में आई थी। अब इसी नदी पर बनने वाला यह बैराज आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के लिए जीवनदायी साबित होगा। राजस्थान वाटर ग्रिड कार्पोरेशन लिमिटेड इस बैराज का निर्माण नवनेरा-गलवा-ईसरदा लिंक परियोजना के अंतर्गत कर रहा है, जिसकी भराव क्षमता 45.30 एमसीवीएम निर्धारित की गई है। इसके लिए किशनगंज तहसील की पांच ग्राम पंचायतों के 12 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। निर्माण कार्य के लिए स्थल पर आवासीय कॉलोनी तैयार की गई है और भारी मशीनरी, जेसीबी व डंपर की तैनाती शुरू हो चुकी है। बैराज से मिलने वाला पानी नहरों के माध्यम से महलपुर बैराज होते हुए अजमेर, जयपुर और टोंक तक पहुंचेगा, जिससे इन जिलों में पेयजल संकट काफी हद तक दूर होगा। इसके अलावा खेती के लिए भी यह पानी बहुत उपयोगी साबित होगा। परियोजना को पहले ईआरसीपी के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में रामसेतु परियोजना के रूप में पुनर्गठित किया गया। कूल नदी पर मिट्टी डालकर बांध तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और यह विशाल परियोजना अगले चार वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है।
Published: December 2, 2025
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Source: Meta News Channel
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