भरतपुर महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के नाम पर खर्च किए गए हजारों करोड़ रुपये अब सवालों के घेरे में हैं। ज़मीनी हकीकत यह है कि न तो महिलाओं को पर्याप्त ट्रेनिंग मिल पाई और न ही स्थायी रोजगार के अवसर तैयार हो सके। हालात इतने खराब हैं कि सरकारी दावों के बावजूद अब तक केवल 66 उत्पाद ही अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर पहुंच पाए हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला समूहों का कहना है कि उन्हें काम सिखाने, मार्केटिंग समझाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की बात कही गई थी, लेकिन अधिकारी महीनों तक नजर नहीं आते। कई महिलाओं ने आरोप लगाया कि योजनाओं की समीक्षा सिर्फ फाइलों में होती है, जबकि मौके पर कोई मार्गदर्शन नहीं दिया जाता।
महिला स्वयं सहायता समूहों का कहना है कि अगर सही प्रशिक्षण, कच्चा माल और बाज़ार तक सीधी पहुंच मिलती तो वे आत्मनिर्भर बन सकती थीं। अब सवाल उठ रहा है कि जब फंड मौजूद था तो उसका सही उपयोग क्यों नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाएंगी।
Published: February 7, 2026
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Source: Meta News Channel
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