अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दवाओं पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का बड़ा फैसला लिया है, जो 1 अक्टूबर से लागू होगा। इस फैसले का
सीधा असर हिमाचल समेत भारत की दवा कंपनियों पर पड़ेगा। अब तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा दवा आयातक रहा है, लेकिन टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका में सप्लाई होने वाली दवाओं की कीमतें दोगुनी हो जाएंगी। हिमाचल प्रदेश से करीब एक दर्जन दवा कंपनियां अमेरिका को नियमित रूप से सप्लाई करती हैं, जिनमें मोरपेन, इमाकल्स लाइफ साइंस, पिनाकल, एल्कम, मेकलियोड्स, ग्लेनमार्क और पनेशिया जैसी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के पास यूएसएफडीए का प्रमाणपत्र है, जो उन्हें अमेरिका में दवा निर्यात करने की अनुमति देता है।
ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन हिमाचल के प्रवक्ता संजय शर्मा का कहना है कि इस टैरिफ के चलते भारत की दवाएं अमेरिकी बाजार से बाहर हो सकती हैं। वहीं ड्रग कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने भी माना कि इस फैसले का असर प्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री पर गहरा पड़ेगा। गौरतलब है कि अमेरिका पहले ही भारतीय उत्पादों जैसे कपड़े, जेम्स-ज्वेलरी और सी फूड पर 50 फीसदी टैरिफ लगा चुका है। अब दवाओं पर यह नया टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय फार्मा सेक्टर के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
Published: September 27, 2025
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Source: Meta News Channel
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