राम मंदिर को लेकर पाकिस्तान की बयानबाजी पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा है कि उसे किसी तरह का लेक्चर देने की जरूरत नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद संविधान और कानून के दायरे में हुआ है। मंदिर निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी रही है और इसमें देश की न्यायिक व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की स्थापना की, जिसे लेकर पूरे देश में उत्साह देखा गया। यह आयोजन मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक था और इस दौरान प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए एकता, आस्था और सांस्कृतिक विरासत की बात कही। भारत ने अपने जवाब में पाकिस्तान को याद दिलाया कि वह स्वयं अल्पसंख्यकों की हालत, धार्मिक स्थलों पर हमले और मानवाधिकार उल्लंघन को संभालने में विफल रहा है, ऐसे में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करना बिल्कुल अनुचित है।
भारत ने आगे कहा कि राम मंदिर का निर्माण भारतीय संस्कृति, आस्था और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती का प्रतीक है। इस मुद्दे पर किसी भी बाहरी टिप्पणी का कोई महत्व नहीं है। सरकार ने कहा कि पाकिस्तान जैसे देशों को पहले अपनी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, फिर दूसरे देशों पर बयान देना चाहिए।
Published: November 27, 2025
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Source: Meta News Channel
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