हम चलती-फिरती लाश बनकर जी रहे हैं…” — यह दर्द भरे शब्द एक बांग्लादेशी हिन्दू नागरिक ने आजतक से बातचीत में कहे, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
अल्पसंख्यकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बांग्लादेश में रह रहे हिन्दू समुदाय के लोगों का कहना है कि वे लगातार डर, असुरक्षा और भेदभाव के माहौल में जीवन गुज़ारने को मजबूर हैं।
पीड़ित व्यक्ति ने बताया कि आए दिन मंदिरों पर हमले, घरों में तोड़फोड़ और जान-माल की धमकियाँ मिलना आम बात हो गई है। प्रशासन से मदद की उम्मीद करने पर भी अक्सर उन्हें निराशा ही हाथ लगती है।
उन्होंने कहा कि उनकी पहचान ही अब उनके लिए खतरा बन चुकी है और हर दिन ऐसा लगता है जैसे वे सिर्फ ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहे हों, जी नहीं रहे।
इस बयान के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी होती है।
यह सवाल अब और गहरा होता जा रहा है कि आखिर बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी।
Published: December 24, 2025
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Source: Meta News Channel
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